Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi | अटल बिहारी वाजपेयी जीवन परिचय | StarsUnfolded - हिंदी
Atal Bihari Vajpayee Biography in Hindi | अटल बिहारी वाजपेयी जीवन परिचय | StarsUnfolded - हिंदी

| जीवन परिचय | |
|---|---|
| वास्तविक नाम | अटल बिहारी वाजपेयी |
| उपनाम | अटल जी |
| व्यवसाय | भारतीय राजनेता |
| पार्टी/दल | भारतीय जनता पार्टी ![]() |
| शारीरिक संरचना | |
| लम्बाई | से० मी०- 168 मी०- 1.68 फीट इन्च- 5’ 6” |
| वजन/भार (लगभग) | 75 कि० ग्रा० |
| आँखों का रंग | काला |
| बालों का रंग | सफेद |
| व्यक्तिगत जीवन | |
| जन्मतिथि | 25 दिसंबर 1924 |
| आयु (मृत्यु के समय) | 93 वर्ष |
| जन्मस्थान | ग्वालियर राज्य, ब्रिटिश भारत (अब, मध्य प्रदेश, भारत) |
| मृत्यु तिथि | 16 अगस्त 2018 |
| मृत्यु स्थल | एम्स, नई दिल्ली |
| मृत्यु का कारण | लंबी बीमारी के कारण (किडनी संक्रमण और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं) |
| समाधि स्थल | राष्ट्रीय स्मृति स्थल, नई दिल्ली |
| राशि | मकर |
| हस्ताक्षर | ![]() |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| गृहनगर | ग्वालियर, मध्य प्रदेश, भारत (उनका पैतृक गांव आगरा, उत्तर प्रदेश में है) |
| स्कूल/विद्यालय | सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय, गोरखी, बारा, ग्वालियर |
| कॉलेज/महाविद्यालय/विश्वविद्यालय | विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मी बाई कॉलेज), ग्वालियर, मध्य प्रदेश, भारत दयानंद एंग्लो-वैदिक (डीएवी) कॉलेज, कानपुर, उत्तर प्रदेश, भारत |
| शैक्षिक योग्यता | ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज (अब लक्ष्मी बाई कॉलेज) से हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत के साथ स्नातक दयानंद एंग्लो-वैदिक कॉलेज, कानपुर से राजनीति विज्ञान में एम.ए (M.A) |
| राजनीतिक आरम्भ | अगस्त 1942 में, जब उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। |
| राजनीतिक यात्रा | • अगस्त 1942 में जब उन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिया। • 1951 में वह भारतीय जनसंघ (एक नवगठित हिंदू राइट विंग राजनीतिक दल) में शामिल हुए और उत्तरी क्षेत्र के राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किए गए। • 1957 में उन्होंने उत्तर प्रदेश में मथुरा से लोकसभा चुनाव लड़ा और राजा महेंद्र प्रताप से हार गए। • 1957 में वह उत्तर प्रदेश के बलरामपुर से पहली बार लोकसभा के लिए चुने गए। • 1968 में वह जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। • 1975 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आंतरिक आपातकाल के दौरान उन्हें अन्य नेताओं के साथ गिरफ्तार किया गया।और 1977 तक वह जेल में रहे। • 1977 में वह मोरारजी देसाई के मंत्रिमंडल में विदेश मंत्री बने। • 1980 में उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिल कर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का गठन किया और वह बीजेपी के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। • 16 मई 1996 को, वह भारत के 10 वें प्रधानमंत्री बने। • 19 मार्च 1998 से 22 मई 2004 तक, उन्होंने फिर से भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। |
| पुरस्कार | • 1992 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। • 1994 में सर्व श्रेष्ठ सासंद पुरस्कार दिया गया। • 2015 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया। ![]() |
| परिवार | पिता - कृष्ण बिहारी वाजपेयी (कवि और स्कूल मास्टर) माता- कृष्णा देवी भाई- अवध बिहारी वाजपेयी, प्रेम बिहारी वाजपेयी, सुदा बिहारी वाजपेयी बहन- उर्मिला मिश्रा, विमला मिश्रा, कमला देवी ![]() |
| धर्म | हिन्दू |
| जाति | ब्राह्मण |
| पता | 6-ए, कृष्ण मेनन मार्ग, नई दिल्ली - 110011 |
| शौक/अभिरुचि | कविता लिखना, भारतीय संगीत सुनना, पढ़ना, यात्रा करना |
| विवाद | • वर्ष 1975 में, तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आंतरिक आपातकाल के दौरान उन्हें अन्य नेताओं के साथ गिरफ्तार किया गया था। • उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित बाबरी मस्जिद के विध्वंस के दौरान जनता को उकसाने के लिए उनकी आलोचनाकी गई। |
| पसंदीदा चीजें | |
| पसंदीदा राजनेता | श्यामा प्रसाद मुखर्जी |
| पसंदीदा नेता | मोहनदास करमचंद गांधी (महात्मा गांधी), जवाहरलाल नेहरू |
| पसंदीदा लेखक | शरतचंद्र और प्रेमचंद |
| पसंदीदा कवि | हरिवंश राय बच्चन, रामनाथ अवस्थी, डॉ शिवमंगल सिंह सुमन, सूर्यकान्त त्रिपाठी 'निराला', बाल कृष्ण शर्मा नवीन, जगन्नाथ प्रसाद मिलिंद और फैज अहमद फैज |
| पसंदीदा शास्त्रीय कलाकार | भीम सेन जोशी, अमजद अली खान और हरिप्रसाद चौरसिया |
| पसंदीदा पार्श्व गायक /गायिका | लता मंगेशकर, मुकेश और एस.डी. बर्मन |
| पसंदीदा संगीतकार | सचिन देव बर्मन |
| पसंदीदा अभिनेता/अभिनेत्री | संजीव कुमार, दिलीप कुमार, सुचित्रा सेन, राखी गुलज़ार और नूतन |
| पसंदीदा गीत | (ओ मेरे माझी), (सुन मेरे बंधू रे), (एस.डी बर्मन) और (कभी कभी मेरे दिल में) (मुकेश और लता) |
| पसंदीदा फिल्में | बॉलीवुड: (देवदास) (1955), (बंदिनी), (तीसरी कसम), (मौसम) (1975),( ममता) और (आँधी0 हॉलीवुड: (Bridge Over the River Kwai), (Born Free) and (Gandhi) |
| पसंदीदा गंतव्य | मनाली |
| पसंदीदा भोजन | चाइनीज व्यंजन, झींगा (Prawns), मंगौड़े, गाजर का हलवा, अलवर मिल्क केक, खिचड़ी, पूरी-कचौरी, दही-पकौड़ी, पराँठा, खीर, मालपुआ और कचौरी |
| प्रेम संबन्ध एवं अन्य जानकारियां | |
| वैवाहिक स्थिति | अविवाहित |
| गर्लफ्रेंड एवं अन्य मामले | राजकुमारी कौल (मई 2014 में देहांत ) |
| पत्नी | लागू नहीं |
| बच्चे | बेटा - लागू नहीं बेटी - नमिता भट्टाचार्य (फोस्टर) ![]() पोती- निहारिका ![]() दामाद- रंजन भट्टाचार्य (व्यवसायी) ![]() |
| धन संबंधित विवरण | |
| कार संग्रह | एंबेसडर (मॉडल 1987) |
| घर/एस्टेट | ईस्ट ऑफ कैलाश, नई दिल्ली में एक फ्लैट (150.32 वर्ग मीटर ₹22 लाख मूल्य) ग्वालियर में एक पैतृक घर (1800 वर्ग फुट; ₹6 लाख मूल्य) |
| आय | लागू नहीं |
| कुल संपत्ति (लगभग) | ₹60 लाख (वर्ष 2004 के अनुसार) |

अटल बिहारी वाजपेयी से जुड़ी कुछ रोचक जानकारियाँ
क्या अटल बिहारी वाजपेयी धूम्रपान करते थे ? हाँ
क्या अटल बिहारी वाजपेयी शराब पीते थे ? हाँ
उनका जन्म क्रिसमस के दिन ब्रिटिश भारत के ग्वालियर राज्य में हुआ।
उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में उनक पैतृक गांव बटेश्वर है और बाद में उनके दादा पंडित शाम लाल वाजपेयी बटेश्वर से मध्य प्रदेश के मुरैना जिला में चले गए थे।
उन्होंने अपनी स्कूली शिक्षा सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय, गोरखी, बारा, ग्वालियर से प्राप्त की, जहां उनके पिता कृष्णा बिहारी वर्ष 1935 और 1937 तक स्कूल के हेडमास्टर रहें। उनके पिता को स्कूलों के निरीक्षक के रूप में पदोन्नत किया गया था और निदेशक बनने के लिए भी चुना गया था। उनके पिता भी स्कूल की प्रार्थना लिखने के लिए जाने जाते थे।

अटल बिहारी वाजपेयी स्कूल, ग्वालियर
उन्हें कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति विज्ञान में प्रथम श्रेणी के स्नातक उपाधि (Graduate degree) से सम्मानित किया गया था।
सर्वप्रथम वह ग्वालियर के आर्य कुमार सभा से सक्रियता रूप से जुड़े थे।
बाबा साहेब आप्टे से प्रभावित होने के बाद, 1939 में वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) में शामिल हुए थे और 1947 में पूर्णकालिक सदस्य (प्रचारक) बन गए थे।

अटल बिहारी वाजपेयी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ
आरएसएस में शामिल होने से पहले, अटल जी साम्यवाद (communism) की अवधारणा से प्रभावित थे।
उन्होंने कानून का अध्ययन करते हुए कानपुर के डीएवी कॉलेज में अपने पिता के साथ छात्रावास को साझा किया था।
विभाजन दंगों के कारण उन्होंने अपना कानून अध्यन बीच में ही छोड़ दिया था।
उन्हें उत्तर प्रदेश में एक विस्तारक के रूप में भेजा गया और उन्होंने वहा दीनदयाल उपाध्याय अखबारों के लिए काम करना शुरू कर दिया था जैसे कि पांचजन्य (एक हिंदी साप्ताहिक), राष्ट्रधर्म (एक हिंदी मासिक), दैनिक समाचार पत्र वीर अर्जुन और स्वदेश।

अटल बिहारी वाजपेयी अखबार के साथ
1942 में उन्हें भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के लिए अपने बड़े भाई प्रेम के साथ 23 दिनों के लिए गिरफ्तार कर लिया गया था और इस शर्त पर (लिखित में) रिहा किया गया, कि वह किसी भी ब्रिटिश विरोधी संघर्ष में भाग नहीं लेंगे।
वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी के कट्टर अनुयायीबन गए थे और उनके साथ 1953 में काशिमर में आमरण उपवासपर बैठ गए थे। उनका अनशन कश्मीर सरकार द्वारा लागू उस नियम के खिलाफ था जिसके अनुसार भारत के किसी अन्य राज्य के नागरिक को बिना परमिट के कश्मीर मे परवेश करने की इज्ज़त नहीं थीं। अनशन के दौरान श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मृत्यु हो गई जिसमे युवा अटल को गहरा आघात लगा था।

श्यामा प्रसाद मुखर्जी
- वर्ष 1957 में, उत्तर प्रदेश के बलरामपुर निर्वाचन क्षेत्र से पहली बार (दूसरे आम चुनावों में) अटल जी को लोकसभा के लिए चुना गया था।

अटल बिहारी वाजपेयी एक रैली में
अटल बिहारी वाजपेयी पूरे विश्व में अपने तर्क और पूर्ण भाषा के कारण जाने जाते थे वर्ष 1957 मे लोकसभा में दिया गया अपने पहले भाषण से उन्होंने कई अनुभवी सांसदों को प्रभावित किया था जिनमें से तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू भी एक थे। उन्होंने (जवाहर लाल नेहरू) उसी समय भविष्यवाणी कर दी थी की यह युवा(अटल बिहारी वाजपेयी) एक दिन भारत का प्रधानमंत्री बने गा।
1977 में 30 वर्ष तक केंद्र मे रहने के बाद कांग्रेस का शासन समाप्त हो गया था और पहली बार केंद्र में एक गैर कांग्रेसी सरकार बनी। इस नयी सरकार में अटल बिहारी भारत के विदेश मंत्री बने अप्रैल 1977 मे जब वो पहली बार साउथ ब्लॉक में स्थित अपने विदेश मंत्री के दफ्तर पहुंचे तो वह उन्हें जवाहर लाल नेहरू का छाया चित्र (portrait ) नहीं मिला था। उसी क्षण उन्होंने मौजूद स्टाफ को छाया चित्र वापिस लगाने का आदेश दिया था।
1977 में, अटल बिहारी वाजपेयी संयुक्त राष्ट्र को हिंदी में संबोधित करने वाले पहले व्यक्ति बने थे ।
अटल बिहारी वाजपेयी को भारत के सबसे सफल विदेश मंत्री के रूप में माना जाता था और विदेश मंत्री के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान उनकी काफी प्रशंसा भी हुई थीं। उस समय तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर (Jimmy Carter) लोसो ने 1978 में भारत की यात्रा की थी, जब अटल बिहारी भारत के विदेश मंत्री थे।

अटल बिहारी वाजपेयी के साथ प्रेसीडेंट जिमी कार्टर
अपने पूरे राजनीतिक जीवन में, उनपर कोई गंभीर भ्रष्टाचार का आरोप नहीं लगा था। हालांकि, उत्तर प्रदेश के अयोध्या में “बाबरी मस्जिद” के विध्वंस के लिए भीड़ को उत्तेजित करने के लिए उनकी काफी आलोचना की गई थी। उस भाषण का एक वीडियो भी सामने आया था।
16 मई, 1996 को, वह भारत के 10 वें प्रधानमंत्री बने और वह भी केवल 13 दिनों के लिए, 1998 में 13 महीनों के लिए और फिर 1999 में पूर्ण 5-वर्ष की अवधि के लिए। वो भारत के पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे जिन्होंने 5 वर्ष की पूरी अवधि की सरकार चलाई थीं।

प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अपने कार्यालय में
13 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में उनकी आगवाही में भारत ने एक सफल परमाणु परीक्षण किया इस परीक्षण का नाम ऑपरेशन शक्ति था। इसके बाद भारत विश्व के कुलीन परमाणु क्लब में शामिल हो गया था।

अटल बिहारी वाजपेयी पोखरण परीक्षण
19 फ़रवरी 1999 को, पाकिस्तान के साथ अच्छे संबंध स्थापित करने के लिए लाहौर तक बस यात्रा की।

अटल बिहारी वाजपेयी – लाहौर बस यात्रा
2001 में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल मे एक घुटने की सर्जरी हुई। वर्ष 2009 में उन्हें एक स्ट्रोक का भी सामना करना पड़ा। जिससे उनके बोलने की क्षमता पर भी असर पड़ा।

अटल बिहारी वाजपेयी का खराब स्वास्थ्य
एक रिपोर्ट के अनुसार, अटल बिहारी वाजपेयी और राजकुमारी कौल (ग्वालियर में उनके सहकर्मी) दोनों के मन में एक-दूसरे के लिए भावनाएं थीं। एक बार, उन्होंने उन्हें एक पत्र भी लिखा और कॉलेज पुस्तकालय में एक पुस्तक में रखा, लेकिन उन्हें राजकुमारी कौल से उस पत्र का कोई जवाब नहीं मिला। हालांकि, अटल की जीवन यात्रा का यह महत्वपूर्ण हिस्सा सार्वजनिक चर्चाओं से बाहर रहा था। एक साक्षात्कार में, उन्होंने न तो इसे स्वीकार किया और न ही इनकार किया।
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, पी.वी. नरसिम्हा राव, अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी दोस्त थे।

अटल बिहारी वाजपेयी नरसिम्हा राव के साथ
वह अब तक के एकमात्र सांसद हैं, जिन्हें उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, दिल्ली और गुजरात के चार अलग-अलग राज्यों से चुना गया।
उन्हें भारत के बेहतरीन कवियों में से एक माना जाता है और उन्होंने कई प्रेरणादायक कविताएँ भी लिखी हैं।
वह 47 साल तक संसद सदस्य रहै (राज्यसभा से 2 बार और लोकसभा से 11 बार)
प्रस्तुत है अटल जी की जीवन यात्रा।
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